आज फिर हम शायरियों मे खो चुके है
शायद अब हम किसी और के हो चुके है
दोस्ती-दोस्ती मे हम कब उन्हे दिल दे बैठे
पता ही नहीं चला और हम उनसे प्यार कर बैठे
सब छौङकर हम लग गये हैं यहां कविताऍ बनाने
नींद तो अब गयी यारों हो गये है हम तो दीवाने
जिंदगी कुछ फिल्मी-फिल्मी सी हो चुकी है
शायद 'पहला नशा, पहला खुमार' वाली हालत हो चुकी है
आज फिर हम शायरियों मे खो चुके है
शायद अब हम किसी और के हो चुके है|
wah wah ashish bhai keep it up !! Hum tumhare saath hai
ReplyDeletethanks a lot sushil ji :)
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