Monday, 16 January 2012

आज तो उसको बोल हि दूंगा, नहीं डर मुझे अब ज्ञमाने से


कर दिया है अब तो पागल, मोहब्बत के इस आलम ने
सारी हदें पार कर दी, आज तो इस पगले दीवाने ने
लाख भूलना चाहा पर, वो बसी है मेरी सासों में
आज तो उसको बोल हि दूंगा, नहीं डर मुझे अब ज्ञमाने से


लगता है जैसे हो कोई रिश्ता, उसका जन्मो जन्मो से
देखा है उसको मैने शायद, हर रात अपने सपनों में
झेल लुंगा सारे गम मैं, जो होगी वो मेरी बाहों में
आज तो उसको बोल हि दूंगा, नहीं डर मुझे अब ज्ञमाने से


शायद अब हम किसी और के हो चुके है

आज फिर हम शायरियों मे खो चुके है
शायद अब हम किसी और के हो चुके है

दोस्ती-दोस्ती मे हम कब उन्हे दिल दे बैठे 
पता ही नहीं चला और हम उनसे प्यार कर बैठे
सब छौङकर हम लग गये हैं यहां कविताऍ बनाने
नींद तो अब गयी यारों हो गये है हम तो दीवाने 

जिंदगी कुछ फिल्मी-फिल्मी सी हो चुकी है 
शायद 'पहला नशा, पहला खुमार' वाली हालत हो चुकी है 
आज फिर हम शायरियों मे खो चुके है
शायद अब हम किसी और के हो चुके है|