मोहब्बत थी हमें उनसे सच्ची, पर कीमत कभी उन्होंने ना जानी
फिर दिल उनका भी तोड़ गया कोई और, मोहब्बत फिर भी हमारी ना पहचानी
कोसते थे वो अपनी मोहब्बत को, और हम रोते थे अपनी किस्मत को
क्या समजाये हम किसी को, खुद ही ना समज पाए इस मोहब्बत को
फिर दिल उनका भी तोड़ गया कोई और, मोहब्बत फिर भी हमारी ना पहचानी
कोसते थे वो अपनी मोहब्बत को, और हम रोते थे अपनी किस्मत को
क्या समजाये हम किसी को, खुद ही ना समज पाए इस मोहब्बत को