Wednesday, 6 February 2013

ना समज पाए इस मोहब्बत को

मोहब्बत थी हमें उनसे सच्ची, पर कीमत कभी उन्होंने ना जानी
फिर दिल उनका भी तोड़ गया कोई और, मोहब्बत फिर भी हमारी ना पहचानी
कोसते थे वो अपनी मोहब्बत को, और हम रोते थे अपनी किस्मत को
क्या समजाये हम किसी को, खुद ही ना समज पाए इस मोहब्बत को

Sunday, 3 February 2013

बारिश


इसी बारिश में भीगे थे उनसे इज़हार करने के बाद
आज इसी बारिश में उसकी हर याद को भिगो डाला

हम तो try बार बार करेंगे


उनके इनकार पर सोचा था अब और इकरार ना करेंगे
फिर आपसे मिले तो लगा ना रे हम तो try बार बार करेंगे